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शिक्षा का अधिकार

षिक्षाका अधिकार अधिनियम , 2009 नियम :-
बाल अधिकार संरक्षण राष्ट्रीय आयोग का इस ऐतिहासिक अधिकार के अनुप्रयोग की देख-रेख जिम्मेदारी की गई है।बाल अधिकार संरक्षण राष्ट्रीय आयोग के अन्तर्गत एक विषिष्ट विभाग आने वाले वर्षों या महीने में इस महत्व पूर्ण कार्य की जिम्मेदारी लेगा।इस उद्देष्य की पूर्ति हेतु (एन.सी.पी.सी.आर.) ने षिकायतों के पंजीकरण हेतु एक हेल्पलाइन नं. जारी किया है। एन.सी.पी.सी.आर. इसके अधिनियम की औपचारिक अधिसूचना का स्वागत करता है एवं इसके सक्रिय सफल अनुप्रयोग की ओर अग्रसारित है। एन.सी.पी.सी.आर. देष के सभी नागरिकों के सामाजिक समूह, विद्यालयों, अध्यापकों, प्रषासकों, कलाकारों, लेखकों, सरकारी कार्मिक, विधानमंडल एवं न्यायपालिका के सदस्यों और संबंधित लोगों को बच्चों को योग्य बनाने हेतु साथ काम करने का इच्छुक है और कम से कम 8 वर्ष गुणवत्ता युक्त षिक्षा प्रदान करने हेतु काम करना चाहता है।
चयन परीक्षा में प्रवेष हेतु अभ्यर्भी को निम्न लिखित षर्तें पूर्ण करनी होंगी :-
    अधिनियम के अनुसार यह आवष्यक है कि राज्य द्वारा प्रत्येक बच्चा जो कि 6 से 14 वर्श के बीच में है अनिवार्य रूप से षिक्षा दी जाय। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक बच्चा एक भी पैसा किताब, गण वेष आदि के लिए अदा नहीं करेगा।
    षैक्षणिक वर्ष किसी समय स्कूल जा सकता है और अपने अधिकार की मांग कर सकता है। निजी षैक्षणिक संस्थान कक्षा-1 से अपने सम्पूर्ण स्थानों में से 25 प्रतिषत रिक्तियां आरक्षित रखेंगे।
    अध्यापकों की योग्यता हेतु निर्देषों का कड़ाई से पालन होगा । प्रत्येक स्कूल में अध्यापक विद्यार्थी का अनुपात 1ः30 का होगा। जो कि समय सारणी के अनुसार करना होगा।
    विद्यालयों में न्यूनतम सुविधाएं जैसे कि योग्य अध्यापक, खेल कूद का मैदान, अधिसंरचना आदि उपलब्ध होगा।
    अधिनियम के नियमानुसार सरकार विद्यालय के नैतिक उन्नयन हेतु कुछ तंत्र विकसित करेगी।
    नजदीकी विद्यालय की अवधारणा के अन्तर्गत विद्यालयों को विभिन्न प्रभागों में बाँटा गया है। यह यूनाइटेड स्टेट के प्रारूप के समान है।इसे लागू किया जाना चाहिए जो कि राज्य सरकार और क्षेत्रीय प्राधिकारियों द्वारा प्राथमिक विद्यालयों के 01 किलोमीटर के अन्दर स्थापित किया जायेगा। कक्षा-6 से 8 के बच्चों के संदर्भ में विद्यालय 03 किलोमीटर के नजदीक होना चाहिए।
    वित्तहीन एवं निजी स्कूल यह सुनिष्चित करेंगे कि कक्षा के अन्दर कमजोर एवं असुविधा युक्त समूह के बच्चे स्वयं को निम्न महसूस न करें और न ही उनकी कक्षाएं दूसरे बच्चों की अपेक्षा अलग समय एवं अलग स्थान पर आयोजित की जांए। मुफ्त एवं अनिवार्य षिक्षा का अधिकार अधिनियम 01 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। भारत के लोगों के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है और इसी दिन से षिक्षा का अधिकार अधिनियम उसी प्रकार की कानूनी वैद्यता रखेगा जैसा कि भारतीय संविधान द्वारा अनुच्छेद-21 ए के अन्तर्गत जीवन का प्रत्येक अधिकार प्रदान करता है। 06 से 14 वर्ष के प्रत्येक आयु समूह के बच्चों को 08 वर्ष तक नजदीकी स्कूलों मे उचित कक्षा के माध्यम से प्राथमिक षिक्षा प्रदान की जाये गी।
राज्य किसी भी स्थिति में बच्चे की प्रारंभिक षिक्षा को संरक्षित करेगा एवं बच्चे के पंजीकरण को जिम्मेदारी रखेगा तथा 08 वर्षों की विद्यालयी षिक्षा को पूर्ण करना सुनिष्चित करेगा। प्रपत्रों के अभाव में किसी भी बच्चे के प्रवेष को मना नहीं किया जाएगा, स्कूलो ंमें यदि प्रवेष प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है तो किसी भी बच्चे को प्रवेष लेने से वंचित नहीं किया जाएगा और बच्चों को प्रवेष हेतु किसी भी प्रकार की परीक्षा नहीं देनी होगी। छात्र जो कि दिव्यांग हैं उन्हें भी विद्यालय के मुख्य धारा में ला कर षिक्षित करना होगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बात पर जोर दिया था कि देष के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हमारे बच्चों और नौजवानों की प्रकृति सही षिक्षा के साथ हो, तभी भारत का भविष्य षक्तिषाली, समृद्ध एवं सुरक्षित देष के रूप् में होगा।
    साधारण चयन के माध्यम से सभी निजी विद्यालय कमजोर वर्गों एवं असुविधा युक्त समुदायों से 25 प्रतिषत छात्रों का पंजीकरण करेंगे। इस आरक्षण का कोई भी स्थान रिक्त नहीं हो सकता। विद्यालय में इन बच्चों के साथ अन्य बच्चों जैसा समान व्यवहार किया जाएगा और सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र औसत रुप एको राज्य द्वारा अनुदानित किया जाएगा। (यदि निजी स्कूल में प्रतिछात्र खर्च कम है) अधिनियम के अनुसार सभी स्कूल नियम और षर्तों को मानने के लिए बाध्य होंगे और यदि वे 03 साल तक मानकों को पूरा नहीं करते हैं तो भी उन्हें कार्यान्वयन की अनुमति प्रदान की जाएगी। सभी विद्यालय मान्यता के लिए आवेदन करेंगे। उक्त षर्त नहीं मानने पर निजी विद्यालयों को जुर्माना के रूप् में एक लाख रुपया देना होगा और यदि वे स्कूल चलाना जारी रखते हैं तो इसके लिए 10 हजार रुपया प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। षैक्षिक प्राधिकारी अध्यापकों की योग्यता, षर्तें और प्रषिक्षण को भी नियमानुसार देखेगा। सभी विद्यालयों के अध्यापक योग्यताषर्तों को 05 वर्ष के अन्दर पूरा करेंगे।

बच्चों के लिए मुफ्त तथा अनिवार्य षिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विषेषताएँ :-
ऽ    भारत के 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बीच आने वाले सभी बच्चों को मुफ्त तथा अनिवार्य षिक्षा।
ऽ    प्राथमिक षिक्षा खत्म होने से पहले किसी भी बच्चे को रोका नहीं जाएगा, निकाला नहीं जाएगा या बोर्ड परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं की जाएगी।
ऽ    ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 6 साल से ऊपर है, जो किसी स्कूल में दाखिल अथवा है भी, तो अपनी प्राथमिक षिक्षा पूरी नहीं कर पाया/पायी है, तब उसे उसकी उम्र के लायक उचित कक्षा में प्रवेष दिया जाएगाः बषर्ते किसी धे तौर से दाखिला लेने वाले बच्चों के समकक्ष आने के लिए उसे प्रस्तावित समय सीमा के भीतर विषेष ट्रेनिंग, दी जानी होगी, जो प्रस्तावित हो। प्राथमिक षिक्षा के पूरा होने तक मुफ्त षिक्षा प्रदान की जाएगी।
ऽ    प्रवेश के लिए उम्र का साक्ष्यः प्राथमिक षिक्षा हेतु प्रवेष के लिए बच्चे की उम्र का निर्धारण उसके जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु तथा विवाह पंजीकरण कानून, 1856 या ऐसे ही अन्य कागजात के आधार पर किया जाए गा, जो उसे जारी किया गया हो । उम्र प्रमाणपत्र नहीं होने की स्थिति में किसी भी बच्चे को दाखिला लेने से वंचित नहीं किया जा सकता।
ऽ    प्राथमिक षिक्षा पूरा करने वाले छात्र को एक प्रमाणपत्र दियाजाएगा।
ऽ    एक निष्चित षिक्षक - छात्र अनुपात की सिफारिष।
ऽ    जम्मू-कष्मीर को छोड़कर समूचे देष मेंलागू होगा।
ऽ    आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लिए सभी निजी स्कूलों के कक्षा-1 में दाखिला लेने के लिए 25 फीसदी का आरक्षण।
ऽ    षिक्षा की गुणवत्ता में अनिवार्य सुधार।
ऽ    स्कूल षिक्षक को 05 वर्षों के भीतर समुचित व्यावसायिक डिग्री प्राप्त होनी चाहिए अन्यथा उसकी नौकरी चली जाएगी।
ऽ    स्कूल का बूनियादी ढांचा (जहां यह एक समस्या है) 03  वर्षों के भीतर सुधारा जाए, अन्यथा उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
ऽ    वित्तीय बोझ राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के बीच साझा किया जाएगा।